जीवननामा जो जिया ..जो जाना
हर दिन घड़ी की सुइंयों के साथ भागता और बदलता जीवन . जिसमें जीवन यात्रा की किताब में पीले पड़ चुके पन्नो की सीलन भरी इबारत भी है और आने वाले कल के सुर्ख कोरे कागजों की आहट भी . जिंदगीनामा में सिर्फ जिंदगी है कोडक कैमरे वाली ब्लैक एंड व्हाइट भी और AI वाली रंगीनियत भरी भी .
“मैंने लिखना तब शुरू किया जब शब्द मेरे भीतर कहानियों की तरह उगने लगे।”
बचपन से ही कागज़ और कलम मेरा खेल का मैदान रहे हैं। कानपुर की गलियों में पले-बढ़े, मैंने अपने आस-पास की ज़िंदगी को महसूस किया और उसे शब्दों में पिरोना सीखा। स्कूल की छोटी कविताओं से लेकर ब्लॉग तक का सफर सिर्फ एक जुनून से चला – लिखना।


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